नहीं रहे MDH वाले चाचा (धर्मपाल गुलाटी) 1500 से 2000 करोड़ तक का सफर

 MDH वाले चाचा के नाम से प्रशिद्ध थे धर्मपाल गुलाटी


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पूरी दुनिया मे मसालों के किंग कहे जाने वाले MDH मसालों के Owner धर्मपाल गुलाटी जी का 3 दिसम्बर 2020 को निधन हो गया। अपने (MDH) मसालों के विज्ञापन में वे खुद दिखाई देते थे। पाकिस्तान के सियालकोट बंटवारे में वे भारत आ गए तब उनके जेब मे सिर्फ 1500 रुपये ही थे जिससे कि आज उनका कोरोबर करोड़ो तक पहुचा है। ये सब उनकी मेहनत और लगन से हुआ है।

धर्मपाल गुलाटी जी का रवैया अपने कर्मचारियों के प्रति बहोत ही शानदार था। वे कभी भी अपने कर्मचारियों पर जोर जबरदस्ती नही करते थे । कर्मचारियों और अपने हुनर पर आज MDH मसालों की धाक पूरी दुनिया मे है। धर्मपाल जी के पास एक पद्मभूषण भी था और लक्षमी भी।


तांगा भी चलाया था MDH वाले चाचा (धर्मपाल गुलाटी) ने


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पाकिस्तान के सियोलकोट के बंटवारे के बाद जब वे भारत मे आए तब उनके पास कोई काम नही था और उनके पास सिर्फ 1500 रुपये थे तभी गुलाटी जी ने 650 रूपए का तांगा ( घोड़ा गाड़ी ) खरीदा। एक इंटरव्यू में गुलाटी जी ने बताया कि तब उन्हें तांगा चलाना बिल्कुल भी नही आता था। उनके तांगा का पहला रूट नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से कुतुब रोड एवं दूसरा रुट करोल बाग से बारा हिन्दू राव के बीच मे वे तांगा चलाया करते थे।


छोटी सी दुकान से करोड़ो की फैक्ट्री तक का सफर 

MDH वाले चाचा ( धर्मपाल गुलाटी ) ने करोल बाग में एक छोटी सी मसालों की दुकान से शुरुवात की थी। ओर अपना खुद का एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया जो आज पूरी दुनिया मे MDH के नाम से जाना जाता है 


MDH की फुल फॉर्म 

करोल बाग में एक छोटी सी दुकान से शुरुवात की थी गुलाटी जी ने तभी किसने सोचा था कि एक दिन पूरी दुनिया पर इनके मसाले राज मरेगे। करोल बाग में तब उन्होंने दुकान खरीदीं थी तभी उसका नांम MDH मसाले नही था तब दुकान का नाम महाशियन दि हट्टी  था।जिसे बाद में बदल कर MDH मसाले के दिया।

1923 में जन्म हुआ था गुलाटी जी का


धर्मपाल गुलाटी का जन्म पाकिस्तान के सियोलकोट में हुआ था बाद में पाकिस्तान और सियोलकोट का बंटवारे के कारण उन्हें दिल्ली आना पड़ा। 27 मार्च 1923 को जन्म हुआ था। गुलाटी जी के माता का नाम चानन देवी और पिता का नाम चुन्नीलाल जी था। आप जान कर हैरान हो जायेगे की गुलाटी जी सुबह 4 बजे उठते थे। सुबह जल्दी उठ कर वो कसरत किया करते थे। ओर बाद में सैर पर निकल जाते थे। खाना खा कर वापिस से सैर पर निकल जाते। रात को उन्हें मलाई ओर रबड़ी का बहोत शोक था। जिसे वो कभी नही भूलते थे। इसी दिन चर्या के आधार पर वे सभी को कहते कि " अभी तो में जवान हु "।


कैसे आये वो tv विज्ञापन में 

गुलाटी जी का TV विज्ञापन में आने का कोई इरादा नही था उनका विज्ञापन में आना अचानक से हुआ। एक दिन वो अपने विज्ञापन की शूटिंग सेट पर थे। तभी दुहले के पिता का कोई काम पड़ गया और वो नही आ पाए। तभी गुलाटी जी के मन मे खयाल आया क्यो ने में ही दुहले का पिता बन जाता हूं। जिससे कि मेरे पैसे भी बच जाएंगे। उस के बाद उन्होंने कभी पीछे मूड के नही देखा। गुलाटी जी बहोत बार राजकपूर के साथ भी दिख चुके है। उनकी ओर राजकपूर की इंटरनेट पर बहोत सारी तस्वीरे आप को बड़ी आसानी से मिल जाएगी।


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All photos are downloaded from google. And the post idea is taken from Google News and different news websites.


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